नई दिल्ली , एजेंसी। सरकार ने सोमवार को कहा कि प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने का फैसला समय से पहले नहीं बल्कि ‘समय पर’ लिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया कि यह घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सही समय पर उठाया गया कदम है।
प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक जिले में कई स्थानों पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच यह बयान आया है। व्यापारी भी शुल्क लगाए जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “प्याज पर निर्यात शुल्क लगाने का फैसला समय से पहले नहीं लिया गया है।” केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने पीटीआई से कहा, ”घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए यह सही समय पर लिया गया फैसला है।” सिंह ने कहा कि जब तक स्थिति की मांग नहीं होती, सरकार चुनिंदा राज्यों में थोक और खुदरा दोनों बाजारों में बफर प्याज जारी करने के साथ हस्तक्षेप करेगी।
प्याज की कीमतों में वृद्धि के संकेतों के बीच केंद्र ने शनिवार को प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया। पहली बार प्याज पर निर्यात शुल्क लगाने के फैसले का उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाना भी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमतें लगभग 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। सिंह ने कहा कि वर्तमान में सरकार दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और असम में बफर स्टॉक से प्याज जारी कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में दिल्ली-एनसीआर में 2,500 टन प्याज 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा गया। केंद्र का यह निर्णय प्याज के निर्यात में वृद्धि के कारण भी लिया गया था।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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