आपदा प्रभावित प्रशासन से कई बार कर चुके है पुनर्वास की मांग
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : भले ही आपदा को आए हुए डेढ़ माह का समय बीत चुका हो। लेकिन, आपदा प्रभावित कई परिवारों के जख्म अब भी हरे ही हैं। सैकड़ों परिवार आज भी टैंट लगाकर सड़क किनारे दिन काट रहे हैं। ऐसे में परिवारों के समक्ष छत की चिंता खड़ी हो गई है। प्रभावित परिवार कई बार शासन-प्रशासन से उनके पुनर्वास की मांग उठा चुके हैं। लेकिन, प्रशासन इन परिवारों की सुध लेने को तैयार नहीं है।
13 अगस्त की रात हुई अतिवृष्टि से खोह नदी उफान पर बनी हुई है। इससे गाड़ीघाट, झूलाबस्ती, काशीरामपुर तल्ला क्षेत्र के दर्जनों भवन नदी की भेंट चढ़ गए थे। बेघर परिवारों के लिए प्रशासन की ओर से आसपास के बारात घर व धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई है। लेकिन, दो सप्ताह बाद ही बारात घर व धर्मशाला संचालकों ने उन्हें खाली करवा दिया था। इसके बाद कुछ परिवार तो किराए के भवनों में चले गए। लेकिन, कई परिवार अब भी काशीरामपुर तल्ला में सड़क किनारे टैंट लगाकर रह रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि छत टूटने के बाद वह सड़क किनारे गर्मी व वर्षा की मार झेल रहे हैं। ऐसे में सबसे अधिक परिशानी बुजुर्ग व बच्चों के साथ हो रही है।
प्रशासन कर चुका है इंकार
नदी के आसपास अधिकांश परिवारों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर भवन निर्माण करवाया था। उफान पर बनी नदी से सबसे अधिक नुकसान इन्हीं भवनों को हुआ है। भवन स्वामियों के पास न ही कोई रजिस्ट्री है और न ही भवन से संबंधित कोई दस्तावेज। ऐसे में इस बात की कोई उम्मीद ही नहीं है कि प्रशासन दोबारा इन परिवारों को उक्त स्थान पर बसने की इजाजत देगा। जबकि, अवैध कब्जा कर बसने वालों को मुआवजे का भी कोई प्रावधान नहीं है।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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