नई दिल्ली। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए चुनाव आयोग जहां हर प्रयास में जुटा हुआ है, वहीं राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों के साथ कुछ शरारती तत्वों की ओर से मिलने वाली झूठी शिकायतों से वह परेशान भी है। आयोग ने ऐसी झूठी शिकायतों व अफवाह फैलाने वालों से सख्ती से निपटने की योजना पर काम करना शुरू किया है।
शिकायत के झूठ पाए जाने या फिर यह साबित होने पर कि शिकायत किसी को परेशान करने के लिए की जा रही है, शिकायतकर्ता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उसके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते है।
चुनावों के दौरान वैसे तो किसी भी तरह की गड़बड़ी या फिर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग की ओर से पर्यवेक्षकों की एक बड़ी टीम तैनात की जाती है। इसके बावजूद भी चुनाव आयोग ने चुनावों में जनता की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सी-विजिल (नागरिक सतर्कता) जैसी कई अहम पहल भी की है, जिसमें चुनावों में किसी को कहीं भी किसी तरह की गड़बड़ी दिखने पर वह सीधे उस एप पर जाकर शिकायत दर्ज कर सकता है। ऐसी शिकायतों के मिलने के बाद आयोग 100 मिनट यानी दो घंटे से भी कम समय में कार्रवाई भी शुरू कर देता है। साथ ही इसकी जानकारी शिकायतकर्ता को भी दी जाती है।
आयोग से जुड़े अधिकारियों की मानें तो पिछले चुनावों में जो देखने को मिला है, उनमें बड़ी संख्या में शिकायतें ऐसी थी, जो झूठी थी। यानी उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया था। इन शिकायतों के मिलने के बाद प्रशासनिक टीम जब मौके पर पहुंची तो स्थिति कुछ और ही थी।
फिलहाल पांच राज्यों में हो रहे चुनाव के दौरान आयोग फिर से ऐसी झूठी शिकायतों को लेकर सतर्क हुआ है। साथ ही सी-विजिल एप पर मिलने वाली ऐसी शिकायतों पर पैनी नजर रखने के लिए निर्देश दिए हैं। इस बीच, आयोग के सामने कई ऐसी शिकायतें भी आयी थी, जिसमें पुराने या फिर फोटो को छेड़छाड़ कर इस्तेमाल भी किया गया था।
फिलहाल आयोग ने पांचों चुनावी राज्यों के अधिकारियों को ऐसी शिकायतों को लेकर सतर्क किया है। अमूमन अब तक आयोग ऐसी शिकायतों के जांच में गलत पाए जाने के बाद उन्हें भूल जाता था और शिकायत करने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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