चमोली। गोपेश्वर। हरित क्रांति के जनक और विख्यात षि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन के निधन पर चिपको आंदोलन के नेता चंडी प्रसाद भट्ट समेत उत्तराखंड में वन संरक्षण खेतीबाड़ी के विकास से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। पदम विभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने ड स्वामीनाथन के देहावसान को व्यक्तिगत क्षति बताया है। कहा कि डा स्वामीनाथन जमीन से जुड़े सच्चे विज्ञानी थे। उनके साथ बिताए समय की याद करते हुए भट्ट ने कहा चिपको आंदोलन के दौर से ही स्वामीनाथन जी का स्नेह मिलता रहा। आठवें दशक उनसे मिलने की जो शुरआत हुई वह उनके जीवन के आखिरी तक वैंसी ही बनी रही। अस्वस्थ होने के बाद उनसे मुलाकात का जब भी मौका मिला मिलते समय उनकी उर्जा और गर्मजोशी पहले जैसी ही रहती थी। पूरे स्नेह के साथ मिलते थे, समस्याओं पर अपने विचार रखते थे।

 

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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