हरिद्वार– भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के तत्वावधान में उत्तराखंड इतिहास संकलन समिति और हर्ष विद्या मंदिर पीजी कॉलेज, रायसी के इतिहास विभाग के संयुक्त सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी “ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मध्य हिमालय की विविध सांस्कृतिक धाराएँ” विषय पर केंद्रित होगी, जिसमें विद्वान, शोधार्थी और इतिहासकार इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर पर विचार-विमर्श करेंगे ।
संगोष्ठी का उद्घाटन 30 जनवरी 2025 को प्रातः 10 बजे हर्ष विद्या मंदिर पीजी कॉलेज, रायसी में होगा। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बाल मुकुंद पांडेय, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर विशेष अतिथि डॉ. शैलेश, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तराखंड भी संगोष्ठी में शामिल होंगे। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता होंगे प्रो. राकेश चंद्र भट्ट, पूर्व कुलपति, एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, जो इस विषय पर अपने गहन शोध और अनुभव साझा करेंगे।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सत्र 31 जनवरी को दोपहर 12 बजे होगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमान संजय, संगठन मंत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, उपस्थित रहेंगे। विशेष अतिथि के रूप में प्रो. के.के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की, समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। संगोष्ठी के आयोजन में श्री अभिनव तिवारी, प्रांत संगठन मंत्री, उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

शोधार्थियों को मिलेगा शोध प्रस्तुत करने का अवसर

इस संगोष्ठी में इतिहासकार, शोधार्थी और विषय-विशेषज्ञ मध्य हिमालय की सांस्कृतिक विरासत पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य इस क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपराओं, लोक संस्कृति और पुरातात्विक महत्व को उजागर करना है। शोधार्थियों को अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया जाएगा, जिससे इस विषय पर नए दृष्टिकोण उभरकर सामने आएंगे।

कार्यक्रम संयोजक डॉ० अभिनव तिवारी ने सभी विद्वानों, शोधार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों से अनुरोध किया है कि वे इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में भाग लें और मध्य हिमालय की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में योगदान दें।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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