हरिद्वार।
उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलनकारी नेता उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक पूर्व कैबिनेट मंत्री फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का आज शाम 4:30 बजे उनके हरिद्वार के शिवलोक के निकट स्थित निज निवास में निधन हो गया। दिवाकर भट्ट 79 वर्ष के थे। उनके निधन से उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख नेता थे और वह एक जुझारू योद्धा की तरह उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए लड़े और उन जैसे आंदोलनकारी की वजह से ही उत्तराखंड राज्य का निर्माण हो सका।दिवाकर भट्ट काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले 10 दिन से हुए देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में भर्ती थे। पिछले दिनों ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इंद्रेश हॉस्पिटल में उनका हाल-चाल जानने गए थे। दिवाकर भट्ट 2007 से लेकर 2012 तक भाजपा की सरकार में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री रहे। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही इसीलिए जनता ने उनके इस आंदोलनकारी चरित्र को देखते हुए उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी उन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया और वह इस आंदोलन में सफल रहे उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की अग्रणी नेताओं में उनकी भूमिका प्रभावशाली रही दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद 2002 में गढ़वाल मंडल के कीर्ति नगर से विधानसभा का पहला चुनाव लड़े परंतु वे चुनाव में हार गए उनकी हर से उनकी पत्नी को इतना सदमा लगा कि उन्होंने सल्फास की गोली खाकर अपनी जान दे दी 2007 के विधानसभा चुनाव में हुए कीर्ति नगर से चुने गए और उत्तराखंड में भाजपा की भुवन चंद्र खंडूरी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे उसके बाद में रमेश पोखरियाल निशंक की भाजपा सरकार में भी मंत्री रहे 2012 एवं 2017 के विधानसभा चुनाव में वे चुनाव हार गए अभी केवल एक बार ही उत्तराखंड की विधानसभा के सदस्य रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पुण्यात्मा को श्री चरणों में स्थान देने तथा शोक संतप्त परिजनों को यह असीम दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि दिवाकर भट्ट के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है, राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर जन सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव अविस्मरणीय रहेंगे।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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