जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : आचार्य पंडित राकेश चंद्र लखेड़ा ने शिव कथा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करूणा की मूर्ति है। शिव पूजन से मनुष्य में भक्ति व त्याग की भावना बढ़ती है। उपासना करने वाले में यदि त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए की साधना में कुछ त्रुटि रह गई है।
सुखरौ देवी मंदिर में आयोजित शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण कथा जीव के पूर्व जन्मों के समस्त पापों को दूर कर शिव कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है। भगवान शिव की कथा से शरीर, वाणी, मन द्वारा किए गए पाप धूल जाते हैं। कलियुग में शिव कथा के समान कोई भी कल्याणकारी मार्ग सरल नहीं है। शिव प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते। इसलिए हमें अपनी मर्यादाओं पर रहना चाहिए। कथा श्रवण को पहुंचे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अण्थ्वाल ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से हमारी आने वाली पीढ़ी को बेहतर जीवन जीने का मार्ग मिलता है। इस मौके पर विजय लखेड़ा, धीरज सिंह, जनार्दन ध्यानी, शंकर दत्त, सरोज रावत, इंदू डबराल, मनीष सती, विनोद थपलियाल आदि मौजूद रहे।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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