हरिद्वार,  धर्मनगरी हरिद्वार में आज साधु-संतों और महात्माओं ने एकजुट होकर पश्चिम बंगाल में हिंदू समाज पर हो रही हिंसा के खिलाफ तीव्र विरोध दर्ज कराया। संत समाज ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हुए अत्याचार की तुलना बंगाल की वर्तमान स्थिति से करते हुए इसे “गंभीर और चिंताजनक” बताया है।

हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ महामंडलेश्वर प्रबोधनंद गिरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बंगाल में हिंदू समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है। वहाँ की सरकार मूकदर्शक बनी हुई है और स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। अब केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।”

उन्होंने केंद्र से अपील की कि केंद्रीय सुरक्षा बलों को बंगाल भेजा जाए ताकि वहां रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि अब भी चुप्पी बनी रही, तो यह पूरे देश में गलत संकेत देगा।

हरिद्वार से उठा संत समाज का स्वर
हरिद्वार के प्रमुख संतों ने एक बैठक में यह भी तय किया कि यदि केंद्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो साधु-संत देशभर में जागरूकता अभियान और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि हिंदू समाज की रक्षा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से ही संभव है।

वर्तमान स्थिति पर कुछ अहम आंकड़े

2024 में बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा की 12 से अधिक घटनाएं रिपोर्ट की गईं।

इनमें से 8 घटनाओं में हिंदू समुदाय को लक्षित किए जाने की पुष्टि हुई है (स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार)।

150 से अधिक परिवारों ने पलायन किया या अस्थायी शिविरों में शरण ली।

पुलिस और प्रशासनिक हस्तक्षेप कई मामलों में अपर्याप्त पाया गया।

सरकार से सवाल: आखिर कब मिलेगी सुरक्षा की गारंटी?
संत समाज का कहना है कि देश की सबसे पुरानी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए अब सरकार को “सिर्फ़ बयानबाज़ी” नहीं, बल्कि “मूलभूत कार्रवाई” करनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि एक विशेष जाँच आयोग गठित कर हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग भी उठी
इस बीच, वरिष्ठ महामंडलेश्वर प्रमोद आनंद गिरी ने भी केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा है कि “बंगाल में वर्तमान हालात को देखते हुए तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार हिंदुओं के लिए खतरा साबित हो रही है।”

अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह साधु-संतों की इस गंभीर अपील पर क्या कदम उठाती है।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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