जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : सुखरोदेवी मंदिर में आयोजित शिवमहापुराण कथा वाचन करते हुए आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने किसी भी जीव की हत्या न करना, सत्य बोलना, प्राणियों पर दया करना, इंद्रियों पर काबू करना, शक्ति के अनुसार दान देना ही गृहस्थाश्रम का सबसे उत्तम धर्म है।
राज्य निर्माण आंदोलनकारी व समाज सेवी स्व. सुधा सती के स्मृति में सुखरो देवी मंदिर में शिवमहापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। सर्वप्रथम कीर्तन मंडलियों ने शिव पार्वती के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। तत्पश्चाचत आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने शिव पार्वती के विवाह की कथा का वाचन किया। शिव महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिव पार्वती की बारात जब हिमालय पर्वत पर पहुंची तो माता पार्वती ने शिव से धर्म के स्वरूप के बारे में पूछा। तो शिव ने पार्वती से कहा कि गृहस्थाश्रम का सबसे बड़ा धर्म संसार में जीवों पर दया करना, प्राणियों की हिंसा न करना, अपनी शक्ति के अनुसार दान देना ही गृहस्थाश्रम का सबसे उत्तम धर्म है। इस मौके पर मां भगवती कीर्तन मंडली, एकता कीर्तन मंडली, प्रेम कीर्तन मंडली, राधा कीर्तन मंडली, सिद्धबलि कीर्तन मंडली ने शिव पार्वती के भजन कीर्तनों से माहौल् को भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर प्रकाश चंद्र कोठारी, शंकर दत्त गौड, विजय लखेड़ा, सरोज रावत, निर्मला नैथानी मौजूद रहे।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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