जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : खोह नदी की चपेट में आने से धराशायी हुए भवनों में रहने वाले परिवारों ने तहसील में पहुंचकर शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि आपदा के कारण सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं। लेकिन, सरकारी सिस्टम उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। यदि समय रहते नदी का चैनेलाइजेशन किया जाता तो आज इतनी बड़ी तबाही न होती।
बुधवार को गाड़ीघाट, काशीरामपुर तल्ला व झूलाबस्ती के पीड़ित परिवार तहसील परिसर में पहुंचे। उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी को दिए ज्ञापन में परिवारों ने बताया कि खोह नदी की चपेट में आने से उनके भवन धराशायी हो गए हैं। पाई-पाई इक्कठा कर जोड़ा गया सामान भी नदी के साथ बह गया। बताया कि लगातार आबादी की ओर हो रहे खोह के रूख को बदलने के लिए क्षेत्रवासियों ने स्वयं के पैसों से कर पोकलेंन मशीन मंगवाई थी। लेकिन, प्रशासन ने उक्त पोकलेंन मशीन को चैनेलाइजेशन के लिए नदी में नहीं उतरने दिया। प्रशासन स्वयं तो परिवारों की सुध नहीं ले रहा और यदि परिवार अपनी सुरक्षा के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उन्हें भी रोका जा रहा है। खोह नदी के कारण क्षेत्र की अधिकांश सुरक्षा दीवार भी ढह चुकी है। ऐसे में यदि एक बार फिर नदी उफान पर बनी तो भारी तबाही का मंजर देखने को मिलेगा। पीड़ित परिवारों ने जल्द से जल्द खोह नदी का चैनेलाइजेशन करने व प्रभावितों को सहायता राशि प्रदान करने की मांग उठाई। कहा कि बेघर परिवारों के समक्ष भविष्य को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इस मौके पर माया देवी, रामप्यारी, राजकुमारी, कमलेश कुमार, हरीश चंद्र, हरि शंकर, रमेश पाल, दमयंती देवी, शादाब, अंजुमा, अलीशा आदि मौजूद रहे।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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