हरिद्वार। हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदोरिया, कमल भदोरिया,  सुमेधा भदोरिया (अधिवक्ता), तथा चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्ययनरत) ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 में आवश्यक संशोधन करते हुए देश के प्रत्येक जिले में जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 22, 23, 25 एवं 32 सहित अन्य संवैधानिक प्रावधान प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वर्ष 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था। हालांकि, देश की विशाल जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार तथा मानवाधिकार उल्लंघन के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्तमान व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह गई है।

भदोरिया एसोसिएट्स ने अपने ज्ञापन में कहा कि आज भी पुलिस अत्याचार, अवैध हिरासत, महिलाओं एवं बच्चों पर अत्याचार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उत्पीड़न, दिव्यांगजनों तथा अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों में अनेक पीड़ितों को समय पर न्याय और राहत नहीं मिल पाती। राज्य मानवाधिकार आयोग केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित होने के कारण दूरदराज के नागरिकों के लिए वहां तक पहुंचना कठिन होता है।

ज्ञापन में तर्क दिया गया कि जिस प्रकार प्रत्येक जिले में जिला न्यायालय, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उपभोक्ता आयोग सहित अन्य संस्थाएं कार्यरत हैं, उसी प्रकार मानवाधिकार संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था भी जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना के प्रमुख उद्देश्यों में स्थानीय स्तर पर मानवाधिकार संरक्षण, शिकायतों का त्वरित निस्तारण, पीड़ितों को राज्य मुख्यालय जाने की आवश्यकता समाप्त करना, महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों एवं कमजोर वर्गों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराना, पुलिस थानों, जेलों, बाल गृहों, वृद्धाश्रमों एवं मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण, मानवाधिकारों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा राज्य मानवाधिकार आयोग पर बढ़ते मामलों का भार कम करना शामिल बताया गया है।

ज्ञापन में प्रस्तावित जिला मानवाधिकार आयोग के अधिकारों में मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की सुनवाई, आवश्यक जांच कराना, संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब करना, पीड़ितों को अंतरिम राहत एवं मुआवजे की संस्तुति करना, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा, जिला प्रशासन को आवश्यक सुझाव देना, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मानवाधिकार जागरूकता अभियान चलाना तथा प्रतिवर्ष जिला मानवाधिकार रिपोर्ट प्रकाशित करना शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

भदोरिया एसोसिएट्स का कहना है कि जिला मानवाधिकार आयोग बनने से न्याय आम नागरिक की पहुंच तक पहुंचेगा, शिकायतों का त्वरित निस्तारण होगा, प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी, मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में कमी आएगी तथा लोकतंत्र एवं सुशासन की भावना और अधिक मजबूत होगी।

ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 में आवश्यक संशोधन कर प्रत्येक जनपद में जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना का विधिक प्रावधान किया जाए। साथ ही विधि एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ विचार-विमर्श कर उच्चस्तरीय समिति गठित करने तथा संसद के आगामी सत्र में आवश्यक विधेयक प्रस्तुत कर जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने की मांग भी की गई है।

भूपेंद्र कुमार

By भूपेंद्र कुमार

प्रधान संपादक

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